जनजातीय सुरक्षा मंच द्वारा सरस्वती शिशु मंदिर मे आयोजित की गई बैठक
बैठक में जनजातीय सुरक्षा मंच द्वारा चलाए जा रहे एससी-एसटी वर्गों के लिए विभिन्न हितकारी अभियानो की जानकारी दी गई।
कांटाफोड – जनजातीय सुरक्षा मंच द्वारा सरस्वती शिशु मंदिर लोहारदा मे विभिन्न विषयों पर बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुकेश वास्केल ने बताया की संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 में क्रमश अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए की अखिल भारतीय एवं राज्यवार, आरक्षण एवं संरक्षण के लिए राष्ट्रपति सूची जारी करते हैं ऐसी सूचियां सन 1950 में जारी हुई है। ये सूची जारी होने के आधार पर ही संविधान के उद्देश्य के लिए एससी एसटी वर्गों के लिए हितकारी प्रावधान सरकारों द्वारा लागू किए जाते हैं। एक ओर जहां अनुसूचित जाति हेतु राष्ट्रपति ने जब ये सूची जारी की तब, धर्मांतरित ईसाई एवं मुसलमान को एससी में सम्मिलित नहीं किया गया वहीं दूसरी ओर अनुसूचित जनजातियों की सूची में उक्त दोनों धर्मांतरितों के लोग बाहर नहीं करके एसटी में सम्मिलित रखे गए। मूल रूप से यह एक भारी विसंगति है एवं संविधान के कल्याणकारी न्यायकारी उद्देश्य के विपरीत होकर मूलत संस्कृति वाली बहुसंख्यक एसटी के लिए यह उचित नहीं है। यहां यह जान लेना जरूरी है कि धर्मांतरण के उपरांत आदिवासी सदस्य भारतीय क्रिश्चियन कहलाते हैं जो कि कानूनन अल्पसंख्यक की श्रेणी में आते हैं इस प्रकार धर्मांतरित ईसाई और मुस्लिम दोहरी सुविधाओं का लाभ ले रहे है। जानकारी देते हुए वास्केल ने बताया की इस संबंध में सन 1968 में पूर्व सांसद डॉक्टर कार्तिक बाबू उरांव इस संवैधानिक कानूनी विसंगति को दूर करने के प्रयास किए एवं विस्तृत अध्ययन कर एक पुस्तिका 20 वर्ष की काली रात का लेखन भी किया। । इस प्रकार की मूलभूत विसंगति को दूर करने के लिए संसद की संयुक्त संसदीय समिति का गठन हुआ जिसने अनुशंसा अनुच्छेद 342 में धर्मांतरित लोगों को बाहर करने के लिए संसद कानून द्वारा राष्ट्रपति के 1950 वाले आदेश मे संशोधन किया जाना जरूरी है। हरिओम कर्मा ने बताया की सन 2020 में 448 जिलों में जिला कलेक्टर एवं संभागीय आयुक्त के माध्यम से तथा विभिन्न राज्यों के राज्यपाल व मुख्यमंत्रियों से मिलकर राष्ट्रपति को ज्ञापन द्वारा निवेदन भी किया गया। सन 2021 में डॉ कार्तिक उरांव के जन्मदिवस 29 अक्टूबर के अवसर पर इस बारे में विस्तृत चर्चा की गई। अब तक के प्रयासों पर विस्तृत चर्चा एवं मंथन के उपरांत एक महाअभियान शुरू किया है, जो सड़क से संसद तक चल रहा है। इस क्रम में ग्राम संपर्क कर देशभर में जिला सम्मेलनों का भी आयोजन किया जा रहा है। विगत दिनों दिल्ली में जनजाति सुरक्षा मंच के कार्यकर्ताओं ने सांसद संपर्क अभियान किया है जिसमें 442 सांसदों से संपर्क कर डी लिस्टिंग का कानून बनाने का आग्रह किया है। इस एक सूत्रीय कार्यक्रम को लेकर जनजाति सुरक्षा मंच सड़क से संसद तक एवं सरपंच से सांसद तक आंदोलन संघर्ष एवं संपर्क का अभियान चला रहा है।बैठक मे जनजाति सुरक्षा मंच के सदस्य मुकेश वास्केल, बालूसिंह निगवाल, गजराज सिंह डाबर ,भाजपा जिला महामंत्री पोपेन्द्र सिंह बग्गा, विधायक प्रतिनिधि संजय गुप्ता, बबलू कालिया दारासिंह भार्गव, गोपाल भलावी, भारत निगम, नानुराम वास्केल, गजानंद भुसारिया, हरिओम कर्मा , विधायक प्रतिनिधि मनीष शर्मा विशेष रूप से उपस्थित थे।
