Jun 10 2026 / 1:45 PM

TMC में बगावत: राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने दिया इस्तीफा

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस में जारी अंदरूनी संकट अब और गहरा होता दिखाई दे रहा है। पार्टी की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा देकर ममता बनर्जी खेमे को एक और बड़ा झटका दे दिया है। पिछले कुछ दिनों से पार्टी के भीतर बगावत की खबरें लगातार सामने आ रही थीं और अब सुष्मिता देव के इस्तीफे ने इस संकट को और गंभीर बना दिया है।

इससे पहले तृणमूल के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में लंबे समय तक पार्टी के मुख्य सचेतक रहे सुखेंदु शेखर रॉय भी पार्टी छोड़ चुके हैं। लगातार हो रहे इस्तीफों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि तृणमूल कांग्रेस के अंदर असंतोष तेजी से बढ़ रहा है।

असम के सिलचर से पूर्व लोकसभा सांसद रहीं सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को पत्र लिखकर अपना इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार करने की मांग की। हालांकि उन्होंने अपने इस्तीफे की विस्तृत वजह सार्वजनिक तौर पर नहीं बताई है, लेकिन इसे तृणमूल कांग्रेस में बढ़ती बगावत से जोड़कर देखा जा रहा है।

सुष्मिता देव पहले कांग्रेस में थीं। 2019 लोकसभा चुनाव हारने के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी और 2021 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुई थीं। पार्टी में आने के बाद उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया और बाद में राज्यसभा भेजा गया। ऐसे में उनका अचानक इस्तीफा ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले ही तृणमूल के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने भी राज्यसभा से इस्तीफा दिया था। उन्होंने ममता बनर्जी को लिखे अपने पत्र में पार्टी पर भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ अपराध और कानून व्यवस्था फेल होने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।

रॉय ने अपने पत्र में कहा था कि बंगाल की जनता ने पार्टी के भ्रष्टाचार और अराजकता को खारिज कर दिया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा सरकार अब बंगाल के विकास के लिए काम कर रही है। उनके इस बयान ने बंगाल की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। अब सुष्मिता देव के इस्तीफे ने उस विवाद को और बढ़ा दिया है।

तृणमूल कांग्रेस पिछले कई वर्षों से पश्चिम बंगाल की सबसे मजबूत राजनीतिक ताकत रही है। लेकिन लगातार हो रहे इस्तीफों और अंदरूनी विवादों ने पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर यह बगावत और बढ़ती है, तो आने वाले समय में पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

ममता बनर्जी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती पार्टी को टूटने से बचाने और नाराज नेताओं को मनाने की है। वहीं भाजपा इस पूरे घटनाक्रम को बंगाल की राजनीति में अपने लिए बड़े मौके के रूप में देख रही है। आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस के भीतर की हलचल बंगाल की राजनीति को और गर्मा सकती है।

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