टीएमसी के दोनों गुटों को मिले चुनाव चिन्ह: ममता बनर्जी को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’, बागी गुट को मिला लिफाफा चुनाव चिन्ह
नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के दोनों गुटों के लिए नए नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए हैं। ममता गुट को ममता अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस नाम और चुनाव चिह्न फुटबॉल खिलाड़ी मिला है। पार्टी सूत्रों ने यह जानकारी दी।
वहीं, ऋतब्रत बनर्जी से जुड़े प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम आवंटित किया गया है। निर्वाचन आयोग की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस गुट को लिफाफा चुनाव चिह्न दिया गया है।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी गुट ने शुक्रवार को निर्वाचन आयोग को नए चुनाव चिह्न सुझाए। इनमें क्रिकेट बैट शामिल था। बिना गेंद वाले फुटबॉलर का चिह्न भी सुझाया गया था। साथ ही पार्टी के लिए तीन नाम भी प्रस्तावित किए गए थे। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब निर्वाचन आयोग ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों पर रोक लगाई। दोनों गुट अब पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न इस्तेमाल नहीं कर सकते।
यह रोक छह अक्तूबर को होने वाले उपचुनावों को लेकर है। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होंगे। असम की नगांव संसदीय सीट पर भी उपचुनाव होगा। ममता बनर्जी गुट ने तीन नाम सुझाए थे। ये नाम थे – अखिल भारतीय तृणमूल ममता कांग्रेस, अखिल भारतीय ममता तृणमूल कांग्रेस और ममता तृणमूल कांग्रेस।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता वाले आयोग ने दोनों गुटों को निर्देश दिया था। दोनों को तीन पसंदीदा अस्थायी नाम देने थे। साथ ही मुफ्त चुनाव चिह्नों की सूची से तीन विकल्प भी देने थे। यह सब शुक्रवार सुबह 11 बजे तक देना था। आयोग के 14 पन्नों के अंतरिम आदेश में एक बात साफ की गई।
दोनों गुट अपने अस्थायी नाम में मूल पार्टी से जुड़ा कोई दिखने वाला चिह्न या शब्द रख सकते हैं। आयोग ने कहा कि यह अंतरिम इंतजाम इसलिए किया गया है। इससे दोनों गुटों को बराबर का मौका मिलेगा। साथ ही उनके अधिकार और हित सुरक्षित रहेंगे। यह इंतजाम अंतिम फैसला आने तक लागू रहेगा।
इससे पहले दोनों गुटों के उम्मीदवारों ने टीएमसी के नाम पर नामांकन दाखिल किए थे। दोनों गुटों ने टकराव वाले फॉर्म-बी जमा किए थे। ये नामांकन पश्चिम बंगाल और असम के उपचुनावों के लिए थे। निर्वाचन आयोग ने कहा था कि पार्टी के मुख्य नाम और चिह्न पर रोक जारी रहेगी। यह रोक तब तक लागू रहेगी, जब तक आयोग दावों पर अंतिम फैसला नहीं दे देता। यह फैसला चुनाव चिह्न आदेश, 1968 के पैरा 15 के तहत आएगा।
गुरुवार का यह आदेश तीन सदस्यीय आयोग की सुनवाई के बाद आया। आयोग में विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू भी चुनाव आयुक्त हैं। आयोग ने नई दिल्ली में एक के बाद एक सुनवाई की। अरूप रॉय और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला प्रतिनिधिमंडल दोपहर तीन बजे आयोग से मिला। इसके बाद ममता बनर्जी का प्रतिनिधित्व करने वाला प्रतिनिधिमंडल शाम चार बजे मिला। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कल्याण बनर्जी ने किया। आयोग ने इससे पहले 12 सितंबर को दोनों गुटों से मुलाकात की थी।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने निर्वाचन आयोग के फैसले की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और निर्वाचन आयोग मिलकर काम कर रहे हैं। दोनों मिलकर विपक्षी दलों को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने कथित पार्टी चोरी को भारत के लोकतंत्र के पतन का नया प्रतीक बताया।
