दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह की जीत, भाजपा के प्रत्याशी को 6016 वोटों से हराया
भोपाल। मध्य प्रदेश की चर्चित विधानसभा दतिया के उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज कर ली है। ये सीट मप्र के पूर्व गृहमंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा को लेकर चर्चा में थी। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6016 मतों से पराजित किया।
कांग्रेस ने मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। पार्टी के उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराया।
जिला निर्वाचन अधिकारी और दतिया जिला मजिस्ट्रेट स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि मतगणना के सभी 15 दौरों के अंत में कांग्रेस के घनश्याम सिंह को 66,757 वोट मिले, जबकि भाजपा के आशुतोष तिवारी को 60,741 वोट प्राप्त हुए।
आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार दामोदर यादव ने 22,527 वोट हासिल करके तीसरा स्थान प्राप्त किया। चुनाव में कांग्रेस को 42.39 प्रतिशत, भाजपा को 38.57 प्रतिशत तो तीसरे प्रत्याशी दामोदर यादव को 14.3 प्रतिशत वोट मिले।
बता दें कि कुल 21 उम्मीदवार मैदान में थे। भाजपा ने नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा था तो कांग्रेस की ओर से घनश्याम सिंह चुनाव लड़ रहे थे। इसके अलावा 19 उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में किस्मत आजमा रहे थे। दतिया में 71.44 प्रतिशत मतदान हुआ था।
एक समय घनश्याम सिंह की अपने निकटतम प्रतिद्वंदी पर 12,607 वोटों की बढ़त अजेय लग रही थी, लेकिन भाजपा उम्मीदवार ने अंतिम दौर में इस अंतर को कुछ हद तक कम कर लिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव में जीत के बाद कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने अपना विजय प्रमाण पत्र ग्रहण किया।
कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने कहा कि मैं दतिया की जनता का आभार मानता हूं। जनता ने बहुत साथ दिया। राजेंद्र भारती ने तो चुनाव जिता सकते थे, न हरा सकते थे। मैं मानता हूं भितरघात से वोट कम हुए हैं, नहीं तो जीत और बढ़ी होती। मैं इस जीत को जनता की कृपा मानता हूं। इस जीत से देश में संदेश जाएगा कि भाजपा के अंत की शुरुआत दतिया से हो रही है। 2028 हम जीतेंगे, जो माहौल बनेगा दतिया से, वो पूरे प्रदेश में देश में दिखेगा।
दतिया सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद खाली हुई थी। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को हराया था। राजेंद्र भारती की सदस्यता एक पुराने बैंक धोखाधड़ी मामले में दोषसिद्धि के बाद समाप्त हुई।
यह मामला वर्ष 1998 का है। आरोप था कि उनकी मां के नाम से संचालित संस्था की बैंक एफडी को नियमों के विपरीत बढ़ाकर उससे राशि निकाली गई। अदालत ने इसे बैंक धोखाधड़ी का मामला मानते हुए सजा सुनाई। हालांकि, बचाव पक्ष का कहना है कि मामला बेहद पुराना है और इसके पीछे राजनीतिक कारण भी हैं। इस मामले में उनकी याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
