Sep 24 2026 / 11:02 PM

कोरोना का प्लाज्मा थेरेपी के जरिए इलाज नहीं किया जा सकता: स्वास्थ्य मंत्रालय

नई दिल्‍ली। कोरोना वायरस से निपटने को लेकर प्लाज्मा थेरेपी को उम्मीद की किरण के रूप में देखा जा रहा है। दिल्ली सहित कुछ राज्यों ने मरीजों को यह थेरेपी देनी शुरू भी कर दी है लेकिन इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसको लेकर सचेत करते हुए कहा है कि इस थेरेपी को अभी इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ICMR की ओर से मंजूर नहीं किया गया है। इसे अभी केवल ट्रायल और रिसर्च के रूप में आजमाया जा सकता है। गाइडलाइंस को ठीक से पालन नहीं किया गया तो यह खतरनाक भी हो सकता है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने मंगलवार को कहा, कोरोना वायरस के इलाज को लेकर अभी दुनिया में कोई अप्रूव थेरेपी नहीं है, प्लाज्मा थेरेपी भी नहीं। यह भी अभी प्रयोग के स्तर पर ही है। इसको लेकर कोई सबूत नहीं है कि इसका ट्रीमेंट के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। अमेरिका में भी इसे एक्सपेरिमेंट के रूप में ही लिया गया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि आईसीएमआर ने एक नेशनल स्टडी को लॉन्च किया है। इसके तहत प्लाज्मा थेरेपी के प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा। जब तक यह पूरा नहीं हो जाता और ICMR मंजूरी नहीं देता, इसका इस्तेमाल रिसर्च और ट्रायल के रूप में ही करें।

लव अग्रवाल ने कहा, यदि हम इसे (प्लाज्मा थेरेपी) सही तरीके और गाइडलाइन के तहत ना करें तो मरीज के जीवन को खतरा हो सकता है। जब तक इसका प्रभाव सिद्ध नहीं हो जाता है और अप्रूव नहीं हो जाता तब तक इसको लेकर कोई दावा किया जाना गलत है। कहीं भी इस प्रकार का प्रयोग अवैध है, इससे मरीजों की जान को खतरा हो सकता है।

स्वास्थ्य व गृह मंत्रालय की संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में आज कोरोना वायरस को लेकर नए आंकड़े जारी किए गए। स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 1543 नए मामले सामने आए हैं। इस मामले में रिकवरी रेट 23.3 फीसदी है।

अग्रवाल ने कहा, दुनिया के 20 देश जहां विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के रिकॉर्ड के लिहाज से सबसे ज्यादा केस आए हैं, उन सबकी कुल जनसंख्या के करीब-करीब बराबर अकेले हमारे देश की जनसंख्या है। सोमवार को डब्ल्यूएचओ का डेटा लें तो भारत के मुकाबले उन देशों में 84 गुना ज्यादा केस रिपोर्ट हुए हैं। इसी तरह, भारत में अगर एक कोरोना मरीज की मृत्यु हुई तो उन 20 देशों में 200 मरीज मरे हैं।

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