गंगा दशहरा 2020: इस विधि से करें गंगा पूजन
सनातन धर्म में गंगा दशहरा का विशेष महत्व है। यह पर्व ज्येष्ठ शुक्ल की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस बार यह तिथि 1 जून (सोमवार) को पड़ रही है। स्कन्दपुराण में इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व है। मान्यता है की इस दिन गंगा नाम के स्मरण मात्र से ही सभी पापों का अंत हो जाता है।
मान्यतानुसार इस वर्ष गंगा दशहरा पर सात महायोगों का महासंयोग बन रहा है। सोमवार को दशमी तिथि दोपहर दो बजकर 57 मिनट तक रहेगी।
पौराणिक मान्यता अनुसार गंगाजी का अवतरण 10 महायोगों में हुआ था। ये महायोग ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि, बुधवार, हस्त नक्षत्र, व्यतीपात योग, गर करण, आनन्द योग, कन्या राशि का चन्द्रमा व वृषभ राशि का सूर्य हैं। इन 10 महायोगों के साथ हस्त नक्षत्र व सोमवार का भी विशेष महत्व है।
ये हैं सात महायोग
एक जून को 10 महायोगों में से सात महायोग सोमवार को उपस्थित हो रहे हैं।
ये ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि, हस्त नक्षत्र, गर करण, कन्या का चन्द्रमा व वृषभ राशि का सूर्य व
दोपहर 1.16 बजे के बाद व्यतिपात योग गंगा दशहरा पर्व की शोभा को बढ़ा रहा है।
इन महायोगों में गंगा स्नान व पूजन से 10 प्रकार के पापों, तीन कायिक, चार वाचिक व तीन मानसिक पापों का नाश होता है। यही वजह है कि यह पर्व गंगा दशहरा के नाम से मशहूर है।
मान्यता है कि गंगाजी के पूजन में 10 की संख्या का ही महत्व है।
जैसे 10 पूजा उपचारों से पूजन, 10 ब्राह्मणों की पूजा व 10 दान।
गंगा स्नान में 10 गोते लगाने से 10 प्रकार के पापों का नाश होता है।
