Jun 04 2026 / 12:49 AM

कामदा एकादशी 2020, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आने वाले व्रत को कामदा एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि कामदा एकादशी के व्रत को करने से कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और पुण्य फल की प्राप्ति होती है। सभी व्रतों में एकादशी के व्रत को श्रेष्ठ कहा गया है। कामदा एकादशी के व्रत का महात्म्य भगवान श्रीकृष्ण ने महाराज युधिष्ठिर को बतलाया था। इस साल यह व्रत 4 अप्रैल, शनिवार को है। इस व्रत का पारण द्वादशी तिथि को किया जाता है।

तिथि और शुभ मुहूर्त-

तिथि – 4 अप्रैल 2020, शनिवार
कामदा एकादशी का प्रारंभ – 4 अप्रैल को रात 12 बजकर 58 मिनट से
कामदा एकादशी का समापन – 4 अप्रैल को रात 10 बजकर 30 मिनट पर

पूजा विधि-

कामदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। इस दिन पवित्र नदि, सरोवर या कुंड में स्नान करने का विशेष महत्व है। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

एक लकड़ी के पाट को गंगाजल या शुद्ध जल से धोकर उसके ऊपर पीला कपड़ा बिछाएं। भगवान विष्णु की प्रतिमा को पहले पंचामृत और उसके बाद शुद्ध जल से स्नान करवाएं। प्रतिमा को पाट पर विराजित करें। भगवान विष्णु की पूजन सामग्री से विधि-विधान से पूजाकर उनको सुगंधित फूल, तुलसी दल, ऋतुफल, निष्ठान्न, पंचमेवा, पंचामृत, तिल आदि समर्पित करें। दीपक और धूपबत्ती जलाएं।

पूजा के दौरान श्री लक्ष्मीनारायण के मंत्रों का जाप करते रहें। इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना फलदायी होता है। पूजन होने पर आरती उतारें। आखिर में पूजा में किसी प्रकार की भूल के लिए क्षमायाचना करें। इस दिन किसी योग्य ब्राह्मण या निर्धन व्यक्ति को दान दें साथ ही गाय को भी भोजन करवाएं।

व्रत कथा-

कहा जाता है कि पुण्डरीक नामक नागों का एक राज्य था। यह राज्य बहुत वैभवशाली और संपन्न था। इस राज्य में अप्सराएं, गन्धर्व और किन्नर रहा करते थे। वहां ललिता नाम की एक अति सुन्दर अपसरा भी रहती थी। उसका पति ललित भी वहीं रहता था। ललित नाग दरबार में गाना गाता था और अपना नृत्य दिखाकर सबका मनोरंजन करता था। इनका आपस में बहुत प्रेम था।

दोनों एक दूसरे की नज़रों में बने रहना चाहते थे। राजा पुण्डरीक ने एक बार ललित को गाना गाने और नृत्य करने का आदेश दिया। ललित नृत्य करते हुए और गाना गाते हुए अपनी अपसरा पत्नी ललिता को याद करने लगा, जिससे उसके नृत्य और गाने में भूल हो गई। सभा में एक कर्कोटक नाम के नाग देवता उपस्थित थे, जिन्होंने पुण्डरीक नामक नाग राजा को ललित की गलती के बारे में बता दिया था। इस बात से राजा पुण्डरीक ने नाराज होकर ललित को राक्षस बन जाने का श्राप दे दिया।

इसके बाद ललित एक अयंत बुरा दिखने वाला राक्षस बन गया। उसकी अप्सरा पत्नी ललिता बहुत दुखी हुई। ललिता अपने पति की मुक्ति के लिए उपाय ढूंढने लगी। तब एक मुनि ने ललिता को कामदा एकादशी व्रत रखने की सलाह दी। ललिता ने मुनि के आश्रम में एकादशी व्रत का पालन किया और इस व्रत का पूण्य लाभ अपने पति को दे दिया। व्रत की शक्ति से ललित को अपने राक्षस रूप से मुक्ति मिल गई और वह फिर से एक सुंदर गायक गन्धर्व बन गया।

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