Sep 23 2026 / 10:24 PM

निजामुद्दीन: रात 2 बजे मरकज को खाली कराने पहुंचे NSA अजीत डोभाल

नई दिल्‍ली। कोरोना वायरस संकट के बीच ही राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्‍ली के निजामुद्दीन मरकज से मिले करीब 2000 लोग अब सिरदर्द साबित होते जा रहे हैं। निजामुद्दीन मरकज के मौलाना साद संकट के बीच भी दिल्‍ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियो की सुनने को तैयार नहीं थे। उन्‍होंने बंगलेवाली मस्जिद को खाली करने से साफ इनकार कर दिया था। इसके बाद इस संकट को सुलझाने के लिए राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल की मदद ली गई थी।

जानकारी के मुताबिक मरकज के नेता सुनने को तैयार ही नहीं थे। इस बीच रात 2 बजे NSA डोभाल को वहां पहुंचना पड़ा था। यह ऑपरेशन अब अपने दूसरे दौर में पहुंच चुका है। सुरक्षा अधिकारी अब कोशिश कर रहे हैं कि उन सभी विदेशियों की पहचान कर सकें जो भारत में है। पहले उनकी स्‍क्रीनिंग होगी और फिर इस बात की जांच की जाएगी कि उन्‍होंने कहीं वीजा नियमों को तो नहीं तोड़ा। वहीं जब मौलाना साद ने दिल्‍ली पुलिस और सुरक्षा अधिकारियों की फरियाद को अनसुना करके मस्‍जिद को खाली करने से इनकार कर दिया तो गृहमंत्री अमित शाह ने NSA डोभाल को कॉल किया।

जिसके बाद गृहमंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को मोर्चा संभालने को कहा। गृह मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के अनुसार, डोभाल मरकज में 28-29 मार्च की रात लगभग 2.00 बजे पहुंचे और मौलाना साद को कहा कि वह कब्जेदारों की कोविड -19 संक्रमण की जांच करवाएं। शाह और डोभाल स्थिति के बारे में जानते थे क्योंकि सुरक्षा एजेंसियों ने तेलंगाना के करीमनगर में नौ टेस्ट पॉजिटिव इंडोनेशियाई लोगों को 18 मार्च को मरकज से आने के बाद ट्रैक किया था।

सुरक्षा एजेंसियों ने अगले दिन मरकज संक्रमण के बारे में सभी राज्य पुलिस और सहायक कार्यालयों को अलर्ट भेजा था। जबकि मरकज ने 28 और 29 मार्च को 167 तब्लीगी कार्यकर्ताओं को अस्पताल में भर्ती होने की अनुमति दी थी, लेकिन डोभाल के दखल देने के बाद ही जमात नेतृत्व ने मस्जिद की सफाई की। डोभाल ने पिछले दशकों में भारत और विदेशों में विभिन्न मुस्लिम आंदोलनों के साथ बहुत करीबी संबंध बनाए हैं। यही कारण है डोभाल लगभग सभी मुस्लिम उलेमाओं को जानते हैं और देश के लिए राष्ट्रीय रणनीति बनाने के लिए उनके साथ समय बिताते हैं।

मरकज की सफाई को लेकर ऑपरेशन अब चरण 2 में चला गया है। इसमें सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह प्रयास उन सभी विदेशियों का पता लगाने के लिए है जो भारत में हैं, उन्हें चिकित्सकीय रूप से जांचा जाता है और फिर वीज़ा मानदंडों का उल्लंघन करने पर कड़ी नज़र रखी जाती है। दिल्ली में मार्का में 216 विदेशी नागरिक थे, लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों में 800 से अधिक हैं। इनमें से अधिकांश इंडोनेशिया, मलेशिया और बांग्लादेश के नागरिक हैं। जनवरी के बाद से गृह मंत्रालय ने कहा है, लगभग 2,000 विदेशियों ने मरकज मण्डली में भाग लिया है। प्रारंभिक रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि लगभग सभी ने अपने वीजा की शर्तों का उल्लंघन करते हुए पर्यटकों के लिए वीजा पर भारत में प्रवेश किया।

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