Jun 05 2026 / 12:56 PM

नवरात्रि का तीसरा दिन, करें माता चंद्रघंटा की पूजा, जाने पूजन विधि

आज चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन है। इन नौ दिनों की पूजा अर्चना में आज तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा अर्चना की जाती है। माता चंद्रघंटा की पूजा करने से मन के साथ घर में भी शांति आती है और व्यक्ति के परिवार का कल्याण होता है। शत्रुओं पर विजय पाने के लिए मां की पूजा करते समय घंटा बजाकर उनकी पूजा करें।मां का तीसरा रूप राक्षसों का वध करने के लिए जाना जाता है।

माता अपने भक्तों के दुखों को दूर करती हैं इसीलिए उनके हाथों में तलवार, त्रिशूल, गदा और धनुष होता है। इनकी उत्पत्ति ही धर्म की रक्षा और संसार से अंधकार मिटाने के लिए हुई। मान्‍यता है कि माता चंद्रघंटा की उपासना साधक को आध्यात्मिक और आत्मिक शक्ति प्रदान करती है।

जाने माता चंद्रघंटा के बारे में-

मान्यता के अनुसार देवी चंद्रघंटा ने राक्षस समूहों का संहार करने के लिए जैसे ही धनुष की टंकार को धरा व गगन में गुजा दिया वैसे ही माँ के वाहन सिंह ने भी दहाड़ना आरम्भ कर दिया और माता फिर घण्टे के शब्द से उस ध्वनि को और बढ़ा दिया, जिससे धनुष की टंकार, सिंह की दहाड़ और घण्टे की ध्वनि से सम्पूर्ण दिशाएं गूँज उठी। उस भयंकर शब्द व अपने प्रताप से वह दैत्य समूहों का संहार कर विजय हुई।

माता चंद्रघंटा के स्‍वरूप-

माता दुर्गा के तीसरे रूप में माता चंद्रघंटा का अत्यंत सौम्यता एवं शांति से परिपूर्ण है।माता चंद्रघंटा और इनकी सवारी शेर दोनों का शरीर सोने की तरह चमकीला है। दसों हाथों में कमल और कमडंल के अलावा अस्त-शस्त्र हैं। माथे पर बना आधा चांद इनकी पहचान है। इस अर्ध चांद की वजह के इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। अपने वाहन सिंह पर सवार मां का यह स्वरुप युद्ध व दुष्टों का नाश करने के लिए तत्पर रहता है। चंद्रघंटा को स्वर की देवी भी कहा जाता है।

ऐसे करे माता चंद्रघंटा की पूजा अर्चना-

1-सबसे पहले सुबह नहा-धोकर साफ-सुथरे कपड़े पहन लें।
2-अब माता चंद्रघंटा की पूजा के लिए उनका चित्र या मूर्ति पूजा के स्थान पर स्थापित करें।
3-माता के चित्र या मूर्ति पर फूल चढ़ाकर दीपक जलाएं और नैवेद्य अर्पण करें और घंटा बजाये ।
4-माता चंद्रघंटा को मखाने की खीर का भोग लगाए।
4-इसके बाद माता दुर्गा की कहानी पढ़ें और नीचे लिखे इस मंत्र का 108 बार जप करें।

माता चंद्रघंटा का भोग-

नवरात्र के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा को प्रसन्न करने के लिए उनको भोग में गाय के दूध से बने व्‍यंजनों का प्रयोग किया जाना चाहिए। मां को लाल सेब और गुड़ का भोग लगाएं।मां चंद्रघंटा को मखाने की खीर का भोग लगाना श्रेयस्कर माना गया है। मान्‍यता है कि ऐसा करने से मां खुश होती हैं और सभी दुखों का नाश करती हैं।

माता चंद्रघंटा का मनपसंद रंग-

हिन्‍दू मान्‍यताओं के अनुसार माता चंद्रघंटा को हल्का भूरा रंग अत्यंत प्रिय है। अत: नवरात्र‍ि के तीसरे दिन हल्के भूरे रंग के वस्त्रादि का प्रयोग कर मां की आराधना करना शुभ होता है।

मां चंद्रघंटा का मंत्र-

पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥

माता चंद्रघंटा ध्यान मंत्र-

वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्।
सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥
मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
खंग, गदा, त्रिशूल,चापशर,पदम कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर हार केयूर,किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥
प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुगं कुचाम्।
कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥

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