Jun 06 2026 / 5:50 AM

बागली में है अद्भुत हनुमान प्रतिमा नेता अभिनेता आते हैं दर्शन करने

देवास। देवास जिले के बागली मुख्यालय में स्थित प्राचीन छत्रपति हनुमान मंदिर में विराजित हनुमान प्रतिमा पूरे क्षेत्र में अद्भुत रस से वाली प्रतिमा है।

प्रतिमा की विशेषता
पुजारी मधुसूदन वर्मा बताते हैं कि प्रतिमा जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करती है सुबह बाल रूप दोपहर में किशोर रूप और शाम को वृद्ध रूप में दर्शन देती है।

संगमरमर से बनी प्रतिमा में प्राकृतिक रंग है
9 फीट ऊंची हनुमान जी की अद्भुत प्रतिमा में कई शोध ऐसे हैं जिन्हें वैज्ञानिक भी हल नहीं कर पाए।
यह प्रतिमा एक ही पत्थर में तशी गई है तथा संगमरमर का कलर भी गौर वर्ण त्वचा कलर है।

तीन घटनाओं को दर्शाती है यह प्रतिमा
प्रतिमा के कंधे पर राम लक्ष्मण की प्रतिमा है यह वृत्तांत उसे वक्त का है तब अहिरावण पाताल देवी का भोग लगाने के लिए राम लक्ष्मण को पाताल लोक ले गए थे । उस वक्त पवन पुत्र हनुमान ने पाताल लोक को भेदते हुए राम लक्ष्मण को कंधे पर उठाकर पृथ्वी पर लाए थे इसके पूर्व पाताल लोक की देवी पातलनी उर्फ डाकिनी को पैरों के नीचे दबाकर ऊपर की ओर आ गए दूसरे वृत्तांत में मेघनाथ के वार से राम के भाई लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं उसे वक्त उन्हें बचाने के लिए संजीवनी बूटी की आवश्यकता रहती है वह दृश्य भी या प्रतिमा दिखती है उनके हाथ में संजीवनी पर्वत दिखाई देता है। तीसरा वृतांत हनुमान जी महाराज गर्जना के साथ पर्वत लेकर युद्ध स्थल की ओर जाते हैं तब राम के भाई भरत अद्भुत मानव को देखकर उन्हें बाण से घायल कर देते हैं। उसे वक्त हनुमान जी द्वारा राम लक्ष्मण का वृतांत भारत को सुनाया जाता है तब भारत दुखी होते हैं और घायल हनुमान जी महाराज को अपने बाण पर लेटा कर और भी द्रुत गति से गंतव्य स्थान की ओर पहुंचते हैं। उसे वक्त हनुमान जी का पर घायल अवस्था में रहता है और वह लंगड़े हनुमान के नाम से भी जाने जाते हैं। इन सभी वृतांतों की झलकी दिखाने के बाद संगमरमर से बनी इस प्रतिमा में संजीवनी पर्वत से हरे रंग में औषधि रिसकर हाथों के सहारे पैर में घायल स्थान पर जाकर अपना काम दिखती है कहा जाता है कि संजीवनी पर्वत भी यह सोच रहा था कि वर्तमान में हनुमान जी महाराज स्वयं घायल है और लक्ष्मण की चिंता कर रहे हैं यही सोचकर हनुमान जी के घायल पर को संजीवनी पर्वत ने ठीक किया है। यहां के श्रद्धालु सुनील योगी ने बताया पुराने लोगों से सुना है कि यह प्रतिमा वर्षों पूर्व बैलगाड़ी से राजस्थान के मूर्ति व्यापारी द्वारा कहीं और पहुंचा जा रहा था लेकिन रात्रि विश्राम यहीं पर किया गया दूसरे दिन यह प्रतिमा उसे स्थान से आगे नहीं बड़ी तब बागली गांव वासियों ने व्यापारी से अनुरोध किया की प्रतिमा को यही स्थापित कर दिया जाए लेकिन व्यापारी निश्चित मूल्य पर अड़ गया आखिर भगवान की इच्छा मजबूरी में हनुमान जी की प्रतिमा यही स्थापित करना पड़ी विद्वान बताते हैं कि जहां भी राम का जिक्र होता है हनुमान जी महाराज उसे स्थान पर मौजूद रहते हैं उसे वक्त बागली नगर में अधिकतर घरों में प्राचीन परंपरा अनुसार जय रघुनाथ जी की शब्द का उच्चारण करते थे आज भी पुराने लोग जय रघुनाथ जी की बोलते हैं और यही कारण है कि हनुमान जी महाराज की प्रतिमा यहीं पर विराजित हो गई।

सुनिल योगी, बागली

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