महिला सुरक्षा हेतु पुरुष जागरूकता के लिए पुलिस द्वारा चलाया गया…”में हूँ अभिमन्यु”

अनिल जैन, बड़वाह । महिला सुरक्षा को ध्यान में रख कर अपराधों को रोकने के उद्देश्य से पुलिस विभाग द्वारा पुरुषो को जागरूक करने हेतु “में हु अभिमन्यु ” अभियान चलाया जा रहा है। जिसके तरह पुलिसकर्मी स्कूलों में पहुंच कर छात्रों को न केवल जागरूक करहे है, बल्कि उन्हें कानून के बारे में विस्तार से समझाया भी जा रहा है। गुरुवार को एसडीओपी विनोद दीक्षित एवं नवागत टीआई प्रीतम सिंह ठाकुर शासकीय बालक उमावि पहुंचे। एसडीओपी ने कहा कि विकसित व सुरक्षित समाज का निर्माण महिला व पुरुषों की समान सहभागिता से ही किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ये दहेज, रूढ़िवादिता, अश्लीलता, असंवेदनशीलता, भ्रूण हत्या, अशिक्षा, लिंगभेद जैसे विकारों के लिए सजगता से कार्य करने की आवश्यकता है। कहा कि किसी शहर एवं गांव का नागरिक इस प्रकार के विकारों के विरुद्ध पुलिस की मदद ले सकता है। नवागत टीआई प्रीतम सिंह ठाकुर ने सकारात्मक भूमिका की शपथ दिलाई। यहां उन्होंने अभिमन्यु अभियान से सम्बन्धित अस्थायी सेल्फी पाईंट भी बनाया। इस सेल्फी पाईंट के माध्यम से छात्रों को इस अभियान के तहत जानकारी देकर सभी को महिलाओं, युवतियों एवं बालिकाओं का सम्मान करने, महिलाओं के प्रति हो रहे अत्याचारों के विरोध में आ अभियान आपको अभिमन्यु बनाने के लिए है। जिसमें नशा,अश्लीलता, अशिक्षा, लिंगभेद और भ्रूण हत्या से दूर रहने की अपील करते हुए उन्हें जागरूक किया। इस दौरान एसआई पूजा सोलंकी सहित पुलिसकर्मी एवं स्कूल स्टाफ मोजूद थे। टीआई ने कानून की विस्तार से जानकारी दी – नवागत टीआई प्रीतम सिंह ठाकुर ने छात्रों से पुछा कि आप पुलिस के बारे में क्या जानते है?पुलिस के क्या काम है?, उत्कृष्ट स्कूल का एक भी छात्र जवाब नही दे पाया। इसके बाद टीआई ने पुलिस का गठन हुआ था जब से अभी तक तक की पुलिस की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से बताया। टीआई ने छात्रों से पुछा सजा कोन देता है? छात्र बोले पुलिस.. टीआई ने कहा कि सजा देने का काम पुलिस का नही न्यायाधीश का होता है, हम केवल गिरफ्तार करके उसकी विवेचना तैयार कर चालान बनाकर आरोपी को न्यायालय पेश करने की जवाबदारी है। इसके बाद की प्रोसेस न्यायाधीश द्वरा की जाती है। इसी तरह टीआई ने कानून के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
