Oct 23 2026 / 1:34 PM

महाकाल मंदिर में 100 से ज्यादा NSG कमांडो ने संभाला मोर्चा, सिंहस्थ से पहले मंदिर की सुरक्षा को लेकर मॉकड्रिल

उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए गुरुवार शुक्रवार दरमियानी रात NSG कमांडो की टीम ने मॉक ड्रिल की। इस अभ्यास में डमी आतंकियों से निपटने और डमी बंधकों को सुरक्षित रेस्क्यू करने का अभ्यास किया गया। इस अभ्यास में 100 से ज्यादा NSG कमांडो के साथ स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन और मंदिर प्रशासन के अधिकारी भी शामिल हुए। मॉक ड्रिल का उद्देश्य किसी भी संभावित सुरक्षा खतरे से निपटने की तैयारी करना और आपात स्थिति में सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाना था।

यह अभ्यास महाकाल महालोक के मानसरोवर क्षेत्र से त्रिनेत्र कंट्रोल रूम के बीच आयोजित किया गया। रात 11 बजे शुरू हुई यह मॉक ड्रिल शुक्रवार देर रात 2 बजे तक चली। इसमें अलग-अलग तरह की संभावित सुरक्षा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया और आपसी समन्वय का आंकलन किया गया।

एडिशनल एसपी आलोक शर्मा ने बताया कि श्री महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यहां लाखों-करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। ऐसे में मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से NSG, स्थानीय पुलिस, प्रशासन और मंदिर प्रशासन ने मिलकर यह अभ्यास किया।

उन्होंने कहा कि मॉक ड्रिल के दौरान संभावित सुरक्षा खतरों का आंकलन किया जाता है और यह देखा जाता है कि किसी आपात स्थिति में सभी एजेंसियां किस तरह मिलकर काम करेंगी। इससे सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद संभावित कमियों को पहचानने और उन्हें दूर करने में मदद मिलती है।

एडिशनल एसपी आलोक शर्मा के मुताबिक, इस तरह के अभ्यास से सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनता है और किसी भी खतरे की स्थिति में तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता बढ़ती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस ड्रिल के बाद महाकाल मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही को देखते हुए इस तरह के सुरक्षा अभ्यास महत्वपूर्ण हैं। इनका मकसद यही है कि दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित रहे और किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षा एजेंसियां मिलकर प्रभावी कार्रवाई कर सकें।

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