Oct 28 2026 / 11:28 AM

सीने का दर्द लिए अस्पतालों के चक्कर काटता रहा ट्रैफिक हवलदार, इलाज से किया मना

इंदौर। मुश्किल के इस दौर में लोग डॉक्टर और अस्पतालों के भरोसे हैं। उन्हें उम्मीद है कि डॉक्टर उन्हें बचा लेंगे, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर पता चलता है कि डॉक्टर ने इलाज से मना कर दिया है। इस कारण कई लोगों की मौत हो चुकी है। साथ ही कई लोग जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। ऐसी ही एक घटना का सामना ट्रैफिक थाने में पदस्थ हवलदार ने किया। वह सीने में दर्द लिए तीन अस्पतालों के चक्कर काटता रहा, लेकिन कहीं भी इलाज नहीं मिला। बाद में जाकर एक अस्पताल ने उन्हें भर्ती किया। हवलदार के बेटे ने लापरवाह अस्पतालों के विरुद्ध थाने में रिपोर्ट लिखवाई है।

ट्रैफिक थाने में पदस्थ दिवाकर बघेल (54) निवासी अवंतिका नगर के सीने में बुधवार शाम को अचानक दर्द उठने लगा। बेटा अनुराग, दामाद विनय सिंह और पत्नी ममता तत्काल कार से उन्हें सीधे बॉम्बे अस्पताल लेकर पहुंचे। बाहर खड़े गार्डों ने उन्हें रोक लिया। अनुराग अंदर गए और सीएमओ को बताया कि पिता के सीने में दर्द है। उन्हें दिल का दौरा पड़ा है और पिस्टन लगे हैं, लेकिन डॉक्टर ने भर्ती करने से स्पष्ट मना कर दिया।

इस पर अनुराग पिता को स्कीम-78 स्थित सिनर्जी अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉ. सुबोध जैन ने उन्हें देखा और प्राथमिक उपचार दिया। नाजुक स्थिति देख उन्होंने स्कीम-54 के राजश्री अपोलो जाने की सलाह दी। स्वजन हवलदार बघेल को राजश्री अपोलो अस्पताल लेकर गए तो डॉक्टर और स्टाफ ने देखने से ही इन्कार कर दिया। स्वजन ने उपचार की पुरानी फाइल और डॉ. सुबोध जैन का पर्चा भी दिखाया। बघेल करीब आधा घंटा कार में ही तड़पते रहे, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली।

अनुराग यहां से उन्हें सीएचएल अपोलो अस्पताल लेकर गए, जहां पिता को भर्ती किया गया। डॉक्टर ने बताया कि उन्हें दूसरा अटैक आया था। कुछ देर हो और जाती तो उनकी जान जा सकती थी। पिता को भर्ती कराने के बाद अनुराग विजय नगर थाने पहुंचे और लापरवाह अस्पतालों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। एएसआई एचएल मेहरा ने जांच शुरू कर दी है। अफसरों ने कहा कि लापरवाही बहुत गंभीर है। अस्पतालों के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज निकालकर कठोर कार्रवाई करेंगे।

चौखट से दवा देकर किया रवाना, मौत
चंदन नगर निवासी मो. आमिन के सीने में भी दर्द था। पांच दिन पहले उन्हें अरिहंत अस्पताल ले जाया गया। वहां बाहर बैठे गार्ड ने मरीज को अंदर ले जाने से इन्कार कर दिया। परिजन यूनिक और सुयश अस्पताल लेकर गए। यहां नहीं देखा तो मयूर अस्पताल लेकर गए। डॉक्टर ने बाहर से देखा और दवा देकर रवाना कर दिया। घर आए तो उनकी मौत हो गई। इसी तरह मो. रफीक (चंदूवाला रोड) को अरिहंत, क्लॉथ मार्केट अस्पताल घूमने के बाद घर लौट आए और मौत हो गई।

पत्नी की मौत से दुखी पति ने भी की खुदकुशी
चंदूवाला रोड निवासी नजमा बी भी डॉक्टरों की लापरवाही के कारण दम तोड़ चुकी हैं। उसे भी सीएचएल, गोकुलदास, अरिहंत अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन उपचार नहीं मिला और नजमा की मौत हो गई। उसके गम में पति अबरार घर छोड़ गए और सिरपुर तालाब में कूदकर जान दे दी। इसी तरह शकीना मंजिल निवासी एक गैरेज संचालक की हालत खराब हो गई और शुक्रवार तड़के उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

लापरवाही पर सख्त कार्रवाई करेंगे
निजी अस्पताल मरीजों को नहीं लौटा सकते। जिन अस्पतालों से लौटाया, वहां के सीसीटीवी कैमरे के फुटेज निकाले जाएंगे। उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विवेक शर्मा, आईजी, इंदौर

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