Oct 22 2026 / 8:57 PM

सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली क्राइम ब्रांच ने भेजा नोटिस

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन मामले में जेल से 7 दिन बाद जमानत मिलने के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका के सामने अब दिल्ली क्राइम ब्रांच रूपी मुश्किलें सामने आ गई है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सीजेपी सौरव दास और आशुतोष रांका को नोटिस जारी कर आज ही (22 अक्टूबर) को पेश होने का आदेश दिया है।

दिल्ली क्राइम ब्रांच ने सौरव दास और आशुतोष रांका को अपना बयान दर्ज कराने के लिए आज दोपहर 12 बजे राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच के कार्यालय में पेश होने को कहा है। उनसे जंतर-मंतर पर प्रदर्शन मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ की जाएगी और उनके बयान दर्ज किए जाएंगे।

इससे पहले, बुधवार को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत ने दोनों नेताओं को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानत बॉन्ड पर तिहाड़ जेल से रिहा करने का आदेश दिया था। कोर्ट में दोनों नेताओं ने लिखित में हलफनामा दिया कि जब तक जंतर-मंतर का क्षेत्र डी-नोटिफाई रहेगा, वे वहां न तो शांति भंग करेंगे और न ही किसी प्रदर्शन का आह्वान करेंगे। हालांकि दिल्ली पुलिस ने जमानत का विरोध करते हुए न्यायिक हिरासत 3 दिन और बढ़ाने की मांग की थी।

पुलिस ने यह तर्क दिया था कि उनके बयानों में विरोधाभास है और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। हालांकि बिना शर्त माफी मांगने और दिए गए आश्वासनों को देखते हुए मजिस्ट्रेट ने आगे हिरासत की जरूरत को खारिज कर दिया था। मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे से होगी।

सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर को पार्लियामेंट स्ट्रीट थाना पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 और 170 के तहत निवारक कार्रवाई के रूप में हिरासत में लिया था। दोनों सीजेपी नेताओं पर प्रतिबंधित और डी-नोटिफाइड घोषित हो चुके जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल पर बिना अनुमति प्रवेश करने और प्रदर्शन करने का आरोप था। साथ ही पूर्व में भरे गए शांति बॉन्ड का उल्लंघन किया था।

19 अक्टूबर को उनकी कस्टडी 2 दिन के लिए बढ़ाई गई थी। दोनों सीजेपी दिल्ली की स्पेशल कोर्ट (SEM) के आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हालांकि कोर्ट ने उन्हें पर जमकर लताड़ लगाई थी। साथ ही कई तीखे सवाल पूछे थे। हाईकोर्ट की फटकार के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली थी।

Share With

मध्यप्रदेश