आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक में राजनाथ सिंह की दो टूक- समुद्री सुरक्षा के मामले में केवल बयानबाजी से नहीं चलेगा काम
नई दिल्ली। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फिलीपींस के सेबू में 13वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक- ADMM-Plus में हिंद महासागर क्षेत्र, हिंद प्रशांत क्षेत्र से जुड़े तमाम अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा। भारत ने आतंकवाद, समुद्री जहाजों पर हमलों का भी मामला उठाया।
उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, आज, जब वैश्विक व्यापार मार्ग को अलग-अलग प्रकार के नए अंतर्राष्ट्रीय खतरों का सामना करना पड़ रहा है, तब समुद्री सुरक्षा के प्रति केवल बयानबाजी करना पर्याप्त नहीं है। हमारा संकल्प स्पष्ट है, भारत हिंद महासागर क्षेत्र और व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में, एक विश्वसनीय, नेट सुरक्षा प्रदाता के रूप में कार्य करता रहेगा।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून की केवल वकालत ही नहीं करता, बल्कि समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में उनका दृढ़ता से पालन भी करता है। नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और वैश्विक समुद्री संचार मार्ग की सुरक्षा करने के प्रति हमारी वचनबद्धता, दशकों के निरंतर अनुभवों पर आधारित है। वर्ष 2008 से ही भारतीय नौसेना ने अदन की खाड़ी जैसे अत्यधिक अस्थिर समुद्री गलियारे में लगातार सक्रिय उपस्थिति बनाए रखी है।
इस दौरान भारत ने किसी भी प्रकार के ऐसे बल प्रयोग का सहारा नहीं लिया जो दूसरे देशों के हितों को कमजोर करता हो। अपने अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत की तैनाती के माध्यम से भारतीय नौसेना ने हजारों मर्चेंट जहाजों को सुरक्षा प्रदान की है और समुद्र में जहाजों के अपहरण की अनेक कोशिशों को विफल किया है।
रक्षा मंत्री बोले, भारत अपने ADMM-Plus सहयोगियों के साथ अपने प्रैक्टिकल और युद्ध में परखे गये आतंकवाद-विरोधी अभियान के अनुभवों को साझा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। संयुक्त सैन्य अभ्यास, क्षमता-निर्माण कार्यक्रम और महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी साझा करने के माध्यम से, हम अपनी सामूहिक क्षमताओं को और मजबूत कर सकते हैं। हम एक ऐसे इंडो-पैसिफिक का समर्थन करते हैं, जो सुरक्षित हो, मजबूत हो और जहां शांति और स्थिरता केवल आकांक्षा नहीं, बल्कि हमारे सामूहिक प्रयासों का परिणाम हो।
