सीहोर: प्रदीप मिश्रा की कावड़ यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, कई राज्यों से आये हैं शिवभक्त
सीहोर। कथावाचक प्रदीप मिश्रा द्वारा निकाली जा रही कावड़ यात्रा में बुधवार को सीहोर में शिव भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस यात्रा में अलग-अलग राज्यों से भक्त आकर शामिल हुए हैं। मास की अंतिम अमावस्या को विठलेश सेवा समिति (विठलेश सेवा समिति) के तत्वाधान में इस वर्ष भी शहर की सीवन नदी से मुरली मनोहर एवं कुबेरेश्वर महादेव मंदिर में तक करीब 11 किलोमीटर कावड़ यात्रा निकाली गई।
दावा किया गया की यात्रा में करीब दस लाख से अधिक श्रद्धालु भागवत भूषण पंडित प्रदीप मिश्रा के साथ पैदल चलकर यहां पर भगवान शिव का अभिषेक किया। बुधवार सुबह पंडित मिश्रा ने सीवन नदी घाट पर पहुंचकर विधि-विधान से पूजन अर्चना के बाद कावड़ भरी और उसके बाद लगातार छह घंटे पैदल चलने के बाद मंदिर परिसर में पहुंचे। यहां पर अभिषेक और आरती का आयोजन किया गया।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने मंदिर में आरती के पश्चात सभी श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भगवान भोले की भक्ति करने वाले सदैव प्रसन्न रहते है। कांवड़ यात्रा करने वाले भक्तजनों को कांवड़िया कहते हैं। यात्रा के दौरान भक्तजन जल को कांवड़ में भरकर लाते हैं और फिर लंबी यात्रा करते हुए इस जल से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। मान्यता है कि इससे भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होकर अपने भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं। इस साल ग्रामीणों के आग्रह पर कुबेरेश्वर धाम तक निकाली जाने वाली इस कावड़ यात्रा ने सभी के सहयोग से इतिहास बन गया है।
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी प्रियांशु दीक्षित ने बताया कि कावड़ मेला संपन्न हो गया है। इस साल की कावड़ यात्रा ने पिछले साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पिछले दो दिन में 10 लाख कावड़िए इस बार पहुंचे हैं। जबकि पिछले साल ढाई लाख कावड़िए मंदिर पहुंचे थे। सबसे अधिक संख्या में डाक कावड़िओं की भीड़ उमड़ी है। कावड़ यात्रा मार्ग पर जगह-जगह लोगों ने स्वागत मंच लगाए। जहां कांवड़ यात्रियों के स्वागत के साथ ही जलपान, फलहार की व्यवस्था भी की गई।
सीवन नदी घाट पर मोटर बोट और अन्य संसाधनों की सुविधा रखने के निर्देश दिए थे। देशभर से श्रद्धालु सीहोर पहुंचे। शहर की धर्मशालाएं, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालुओं भीड़ ही नजर आ रही थी, भीड़ को देखते हुए स्टेट हाईवे से गुजरने वाले भारी वाहनों का मार्ग डायवर्ट किया गया। भोपाल से इंदौर जाने वाले भारी वाहनों को सीहोर-आष्टा मार्ग से न भेजकर ब्यावरा-भोपाल व अन्य मार्ग से निकाला गया। कई बार हाई पर जाम जैसी स्थिति बनी रही।
